जैन धर्म
- इसके पहले तीर्थंकर का नाम ऋषभदेव था। इनका चिन्ह वृषभ था
- 23 वे तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे। इनका चिन्ह सांप है। इन्होने चतुर्यान सिद्धांत दिया। झूठ नहीं बोलना है ,चोरी नहीं करना है ,धन नहीं रखना है ,हिंसा नहीं करना है।
- 24 वें तीर्थंकर महावीर स्वामी थे। इनका चिन्ह शेर है। इनको वास्तविक संस्थापक कहा जाता है। इन्होने पांच सिद्धांत दिया है। इन्होने ब्रह्मचर्य जोड़ दिया। महावीर स्वामी का जन्म 540 BC में वैशाली (कुण्डलग्राम ) में हुआ था। ये यांत्रिक कुल के थे। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ और माता का नाम त्रिशला था।और भाई का नाम नंदिवर्मन था। इनकी पत्नी का नाम यशोदा था। इनके बेटी का नाम प्रियदर्शी था। इनके दामाद का नाम जमाली था। ये गृह त्याग 30 वर्ष की आयु में। ये ज्ञान को कैवलय कहते है। इनको साल वृक्ष के निचे और ऋजुपलिका नदी के तट जाम्बिक ग्राम में ज्ञान प्राप्त हुआ है। इन्होने पहला उपदेश राजगीर में पहला उपदेश दिया। इनकी मृत्यु पावापुरी में हुई थी। इन्होने प्राकृत भाषा में दिए। इनके उपदेशों को अर्ध पुरवा कहते है। इनका मुख्य उद्देश्य अहिंसा पर दिए। इन्होने तीन ज्ञान दिए जिसे त्रिरत्न कहते है। -सम्यक ज्ञान ,सम्यक विश्वास ,सम्यक आचरण। मोक्ष का सबसे बड़ी बाधा आत्मा है। इन्होने कठोर नियम दिया और कहा को आत्मा को सताई। इन्होने संलेखन विधि दिया। इन्होने भगवान को नहीं मानते है। इन्होने पुनरजन्म को कहते है।
- इनकी दो शाखा श्वेताम्बर और दिगंबर थे। दिगम्बर कपडा नहीं पहनते है और श्वेताम्बर कपडे पहनते थे। दिगमबर को मानने वाले को मानने वाले को भद्रबाहु कहते है और श्वेताम्बर को मानने वाले को स्थूलबाहु कहते है।
- जैन धर्म की दो संगीति हुई थी। पहली संगीत 300 ई पु में पाटलिपुत्र में हुई थी. दूसरी संगीति 600 AD में बललभी गुजरात में हुई थी।
बौद्ध धर्म
- बौद्ध धर्म का प्रारम्भ महात्मा बुध ने किया। इनका जन्म लुम्बनी में हुआ था। इनका जन्म 583 BC में हुआ था। इनका जन्म इच्छाकु वंश में हुआ था। इनका जन्म शाक्य कुल में हुआ था। इनका बचपन का नाम सिद्धार्थ था। इनके पिता का नाम शुशोधन था और माता का नाम महामाया में हुआ था। इनके मौसी का नाम प्रजापति गौतमी था। इनकी पत्नी का नाम यशोधरा था। इनका बीटा का नाम राहुल था। इनको ज्ञान की प्राप्ति बोधगया में हुआ था। बोधिवृक्ष ,फल्गु (निरंजना )नदी के किनारे प्राप्त हुआ था। पहला उपदेश सारनाथ और अंतिम उपदेश कुशीनगर में। इनका मृत्यु कुशीनगर में हुआ। इनका भाषा पाली थी। इन्होने बौद्ध का तीन रत्न सिद्धांत दिया। मोक्ष की सबसे बड़ी बाधा इच्छा को माना। इच्छा पर काबू पाने के लिए आस्तांगी मार्ग बताया। इनका सबसे प्रिय चेला आनंद था। घर छोड़ने की क्रिया महाभिष्क्रमणीय था।
- घर त्याग को महाभिषिणिकारमन कहते है। उपदेश को धर्मचक्र प्रवर्तन कहते है। बचपन को कमल ,बड़े को साढ़ ,गृह त्याग घोडा,ज्ञान की प्राप्ति बोधिवृक्ष कहते है।
- चार बौद्ध संगीति हुई थी। पहली बौद्ध संगीति -राजगृह ,राजा -आजादशत्रु ,वर्ष -4 83 ,पुरोहित -महाकाश्यप
- दूसरी -वैशाली ,राजा -कालाशोक ,वर्ष -383 ,पुरोहित -शवकमीर
- तीसरी -पाटलिपुत्र ,राजा -अशोक ,वर्ष -255 ,पुरोहित -मोगलीपोती
- चौथा -कुण्डलवन ,रजा -कनिष्क (द्वितीय अशोक ),वर्ष -पहली शादी ,पुरोहित -वसुमित्र ,अश्वघोष ,इस संगीति में बौद्ध धर्म दो भागों में विभाजित हो गया -हीनयान और महायान आगे चलकर एक और भाग में बट गया व्रजयान में बंट गया।
- महाजनपद 16 थे। इसमें सबसे बड़ा महाजनपद मगध था। एक ट्रिक "हशीन मसूक सा "
- हर्यक वंश के संस्थापक बिम्बिसार थे। इनकी राजधानी राजगृह थी। इनके प्रमुख वैद जीवक थे। इन्होने अपने साम्रज्य में अवन्ति को मिला लिया। इनका वैशलि आक्रमण असफल हुआ। इनके बेटा आजादशत्रु ने हत्या कर गद्दी पर बैठ गया ,इसे पितृहत्या कहतेहै।
- आजादशत्रु ने राजगृह का किलाबंदी बनाया। इनके समय के गुप्तचर का नाम वर्षकार था। इन्होने वैशाली पर विजय प्राप्त किया। इसके बेटा उदयिन ने आजादशत्रु की हत्या कर दिया
- उदयिन ने अपनी राजधानी पाटलिपुत्र को बनाया।
- इस वंश का अंतिम शासक नागदशक था। यह अयोग्य शासक था। इसका सेनापति शिशुनाग ने नागदशक की हत्या कर दिया।
शिशुनाग वंश
- इसका संश्थापक शिशुनाग था। इसका राजधानी वैशाली थी।
- इसका अगला और योग शासक कालाशोक था। इसने द्वितीय बौद्ध संगीति का आयोजित किया। इसने राजधानी पाटलिपुत्र कर दिया।
- नंदिवर्मन के सेनापति महापद्मनंद ने हत्या कर दिया।
नन्द वंश
- इसके संस्थापक महापद्मनंद थे। ये क्षत्रियों से नफरत करते थे। इसने सरकषतरनन्तर की उपाधि धारण किया। ये शूद्र जाति से थे। इनका सबसे प्रमुख युद्ध कलिंग था। इसके बेटा का नाम घनान्द था
- घनान्द बहुत ही क्रूर और अहंकारी राजा था। इसके समय सिकंदर ने आक्रमण कर दिया।
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सिकंदर
- इसका मूल नाम एलेक्जेंडर निकेटर था। इसका सेनापति का नाम सेल्यूकस निकेटर था इसके घोडा का नाम बुकफाराल था। इसके पत्नी का नाम रेग्सेना था। इसके पिता का नाम फिलिप था। इसका गुरु का नाम अरस्तु था। यह मेसीडोनिया का था। इसने 326 इ पु में हाइडेस्पीज नदी (झेलम ) नदी के तट पर पोरस को हराया था। सिकंदर विजयी रहा। इसने व्यास (हैफेनिया ) नदी को चली लेकिन लौट गई। 323 ई पु में बेबीलोन में सिकंदर का निधन हो गया
- भारत पर पहला विदेशी आक्रमण ईरान के हरवंनिवेश वंश के डेरियस -1 ने किया था।
सिकंदर का सेनापति
- सेल्यूकस निकेटर ने भारत के साथ युद्ध किया। उस समय मगध का शासक चन्द्रगुप्त मौर्य था। सेल्यूकस के बेटी कार्नेलिया से चन्द्रगुप्त मौर्य से शादी किया। इसने मेगास्थनीज को राजदूत भेजा। इसने एक किताब लिखा 'इंडिका '.
मौर्य वंश
- इसके संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य थे। इसने राजधानी पाटलिपुत्रा था इनके प्रधानमंत्री चाणक्य थे। यूनानी पुस्तक में चन्द्रगुप्त को सैंड्रोकॉस कहते है। इसने जैन धर्म को मानता था। जस्टिन ने इसे सेंडोकोत्तस कहते थे। इसकी पहचान विलियम जोन्स ने किया। अकाल से बचाने के लिए सैगोर (ताम्बा ) . इसने श्रवणबेलगोला में 258 बी सी में मृत्यु हो गयी।
- बिन्दुसार चन्द्रगुप्त मौर्य का पुत्र है। सीरिया के नरेश के राजदूत का नाम डैनेकस था। इसका पुत्र अशोक था।
- अशोक के अभिलेख लिपि ब्राह्मणी ,खरोष्ठ्ति ,अरमाइड और ग्रीक में था
- अशोक के अभिलेख को पढ़ना जे प्रिंसेप ने पढ़ा। इनका नाम प्रियर्दर्शी लिखा है।
- इसने गुर्जर ,मस्की में अशोक नाम लिखा है। गुर्जरा अभिलेख मध्यप्रदेश में है और मस्की कर्णाटक में है।
- राजस्थान के भबरू अभिलेख में सम्राट अशोक लिखा है।
- सबसे छोटा अभिलेख रुमानदेहि (नेपाल ) अभिलेख है।
- अशोक के कौशाम्बी अभिलेख में अशोक की पत्नी के बारे में चर्चा है।
- भब्रू अभिलेख में बौद्ध धर्म के त्रिरत्न की चर्चा है।
- अशोक के 14 अभिलेख है।
- पहला अभिलेख में अहिंसा का उल्लेख है। दूसरा अभिलेख में पशुचिकित्स (दक्षिण भारत ) की चर्चा है। तीसरा तीसरे अभिलेख में तीन अधिकारी (राजुक ,युक्तक और प्रदेशक ) की चर्चा है। चौथा अभिलेख में भैरीघोष के स्थान पर धममघोष की चर्चा है। पांचवा शिलालेख में धम्म महामात्र का उल्लेख है। सातवा अभिलेख सबसे बड़ा शिलालेख है। आठवां शिलालेख में धम्म यात्रा की चर्चा है। बारहवां शिलालेख स्त्री महा की चर्चा है। 13 अभिलेख में कलिंग युद्ध की चर्चा है। इस वंश का अंतिम शासक बृहद्ररथ थे।
- बृहद्ररथ की हत्या पुष्यपुत्र शुंग ने कर दिया।
- शक शासक के प्रमुख रुद्रदामन थे।
कुषाण शासक
- ये शैव धर्म का पालन करते थे। ये भारत के नहीं थे। इसके संस्थापक का नाम कुंदलकड़पीड़क था। इसका पोता का नाम कनिष्क था।
- कनिष्क पाटलिपुत्र पर आक्रमण किया था। यह महायान शाखा को मानता था। इसने चौथी बौद्ध संगीति कराया था। यह कुषाण वंश का प्रतापी शासक था। इसने महात्मा बुद्ध के विक्षा पात्र लेकर चला गया था।
- ब्राह्मणो को सबसे ज्यादा भूमि दान गुप्त शासक ने दिया था। इस वंश की राजधानी कौशाम्बी थी। इस वंश की संस्थापक श्रीगुप्त थे। लेकिन वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त -1 प्रथम था। इस वंश का प्रतापी शासक समुद्रगुप्त था इसको लिच्छवि दौहित कहते है ,भारत का नेपोलियन ,इसे धरणिबंध और कविराज भी कहते है। इसके मयूर शैली का सिक्का चलाया था। इसे वीणा बजाते हुए देखा गया। इसका घोडा तीन समुद्र का पानी पिता था। प्रयाग प्रस्शती अभिलेख समुद्रगुप्त का था।
चन्द्रगुप्त द्वितीय -2
- शकों का अंत किया। इसने चांदी का सिक्का चलाया। इसने विक्रममादित की उपाधि धारण की थी। इसने राजा -रानी का सिक्का चलाया था। इसके समय फाह्यान चीनी यात्री आया था। इसकी यात्रा विवरण का नाम फ़ो -क्यू -की थी। इसके समय संस्कृत के कई विद्वान रहते थे। इसके समय हिन्दू धर्म का विकास हुआ था। भारत का स्वर्ण युग इस युग को कहा जाता है। इसके समय 9 रत्न रहते थे। इसके समय कालिदास रहते थे।
- इस वंश का अगला शासक कुमार गुप्त था। इन्होने नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। इस काल में अजानता की गुफा बनी। सुदर्शन झील का निर्माण चन्द्रगुप्त मौर्य ने कराया था। इसका जिरोंधारा अशोक ने कराया। इसका पुनर्निर्माण रुद्रदामन ने किया। स्कंदगुप्त ने भी पुनर्निर्माण किया। गुप्त समय का अंतिम शासक विष्णुगुप्त था। हुण्ड वंश ने गुप्त वंश को अंत कर दिया
वर्धन वंश
- इस वंश संस्थापक पुष्यभूति वंश थे। सबसे प्रचलित शाशक हर्षवर्धन थे। इसके पिता प्रभाकर वर्धन थे। इसके भाई राजयवर्धन था। इसकी बहन राजश्री थी। इसके बच्चे नहीं थे। इसने अपनी राजधानी कन्नौज बनाया। इसने बहन को राजगदद्दी पर बैठा दिया। बौद्ध वृक्ष को शशांक ने कटवा दिया। इसके समय में ह्वेनसांग आया था। इसका विरोध ब्राह्मणो ने किया था। हर्षवर्धन को नर्मदा नदी पर पुलकेशिन -2 ने हराया था।
संगम काल
- तमिलनाडु में तीन संगीति को संगम काल कहते है।
- हिस्ट्री class 7