UPSC HISTORY (NOTES)

  • इतिहास के जनक - हेरोडोटस 
                                                                 इतिहास 

इतिहास तीन प्रकार के होते है :-     

  1. प्राक ऐतिहासिक  - इसका लिखित साक्ष नहीं है। 
  2. आद्य ऐतिहासिक  - इसका लिखित साक्ष है लेकिन स्पष्ट नहीं है। 
  3. ऐतिहासिक         - इसका लिखित और स्पष्ट साक्ष है। 


  • इतिहासकार थॉमसन का कथन है "धातुओं के आधार पर इतिहास को त्रियुगीन में बांटा है। "
  • जो इस प्रकार है "पाषाणकाल (पत्थर )" "कास्ययुग (तांबा )" और लौहयुग 
  • पूरी दुनिया के पुरात्विक संग्रहालय "कोपेनहेगन " में है जो डेनमार्क यूरोप में है। 
  • भारतीय पुरात्विक संग्रहालय "भोपाल " में है जिसे जिसे मानव संग्रहालय कहते है। इसका दूसरा नाम इंदिरा गाँधी संग्रहालय है। यह विभाग संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत आता है। 
  • कनिघम को पुरातत्विक का जनक माना जाता है। 
  • पुरातात्विक भूगर्भ वैज्ञानिक "ब्रुश "को कहा जाता है। 
इतिहास को तीन भागों में बांटा गया है जो क्रमश प्राक ऐतिहासिक ,आद्य ऐतिहासिक और ऐतिहासिक है। अब पाषाणकाल के बारे में पढ़ते है इसे पत्थर काल भी कहा जाता है। इसे भी तीन भागों में बाँटा गया है। 
  1. पूरा पाषाण काल - इस काल में आग का अविष्कार हुआ था। 
  2. मध्यपाषाण काल - इस काल में पशुपालन के साक्ष्य मिला था और आदमगढ़ (मध्यप्रदेश ) में है। 
  3. नवपाषाण काल - इस काल में कुत्ता के पालन के साक्ष्य  मिला है। इस काल में व्यव्स्थिदंग से पशुपालन पशुपालन के साक्ष्य मिला है। इस काल में कृषि के भी साक्ष्य मिला था। जौ का साक्ष्य ईरान से मिला। 
  4. ताम्रपाषण काल 

नव पाषाण काल - कृषि - जौ का साक्ष्य - ईरान 
                           गेहूं - मेहरगढ़ में साक्ष्य -(वयवस्थित ढंग से कृषि )-इसकी खुदाई 7000 पहले हुई थी। 

चावल का साक्ष्य - कोल्डिहवा जो की उतर प्रदेश में है। 

लेहुरादेव -यह भी उतर प्रदेश में है -सबसे पहले चावल की खेती के साक्ष्य यही से प्राप्त हुई थी। -इसकी खोज  8000 पहले हुई थी। 
इस काल में पहिया और मृदभांड की खोज हुई थी। 
गेरुवर्णीय मृदभांड हस्तिनापुर में मिला था। सबसे अधिक मृदभांड हस्तिनापुर से ही प्राप्त हुआ था। 
मेहरगढ़ सुलेमान और किरथर पहाड़ियों के बीच। 
  • भीति -इसका अर्थ है दिवार पर चित्र। 
  • चिल्कोलिक - इसका अर्थ है की ताम्रपाषाण काल। 
  • माइक्रोलीक - मध्यपाषाण काल -इस समय में अंत्येषिट संस्कार प्राप्त हुआ था। 
  • लोहा का अयस्क - मैग्नेटाइट 
  • ताम्रपाषाण काल - चिलकोलीक
  • सबसे ज्यादा हड्ड़ी और लास : नवपाषाण (विशालशव =मेघालीय )
  • अतिरंजीतखेड़ी (उतर प्रदेश ) में लौह की खोज हुई थी। 
    अंगुत्तरनिकाय में 16 महाजनपदों का उल्लेख है। 
  • महाजनपद शहरी व्यवस्था थी। 
खेती =मध्यपाषाण काल = आदमगढ़ (मध्यप्रदेश ), बागोर (राजस्थान ) , सराय बहादुर (उतर प्रदेश ) (इन स्थानों पर अव्यस्थित तरह से खेती के साक्ष्य मिला था। 

खेती = नवपाषाण काल = लेहुरादेव (उत्तर प्रदेश ), मेहरगढ़ (पाकिस्तान ) (इन स्थानों पर सुव्यवस्थित ढंग से खेती के साक्ष्य मिला )

धान का साक्ष्य =कोल्डिहवा से प्राप्त हुआ 

मानव की खोपड़ी भारत में तमिलनाडु में मिला था। 
मध्यपाषाण काल = दमदमा (उत्तरप्रदेश )=यहाँ शव मिला था।  , महदहा (उत्तरप्रदेश ) = यहाँ हड्डी मिला था। 

ब्यूरी का कथन है कि इतिहास एक विज्ञान है। 

                                                सिंधु सभ्यता 

इस सभ्यता का सन्देश मेसन ने दिया था। इसकी जाँच का आदेश कनिघम ने दिया। इसकी खुदाई की जिम्मेदारी मार्शल पर था। इसकी खुदाई दयाराम साहनी ने किया था। यह सभ्यता 13 लाख किलोमीटर में फैला था।  इस सभ्यता का आकर त्रिभुजकार था। 

इस सभ्यता के चार प्रमुख शहर है इनको याद करने का ट्रिक है -
  • सम AD  ( सुत्कागेंडोर ,मांडा ,आलमगीरपुर ,दैमाबाद ) यह शहर जिन नदियों के पर स्थित है उनका भी शार्ट ट्रिक है। ट्रिक - डच है पर ( डाच नदी ,चिनाव नदी ,हिंडन नदी ,परावर नदी )
  • हड़प्पा - यह मांडगोवारी ,पंजाब (पाकिस्तान ) में है। यह रवि नदि के तट पर है। 
  • मोहनजोदाड़ो -यह लडक़ाना जिला ,पाकिस्तान में है। यह सिंधु नदी के तट पर है। 
  • कालीबंगा - यह हनुमानगढ़ ,राजस्थान में है। यह घग्गर नदि के तट पर है। 
  • धौलावीर -यह गुजरात के कच्छ जिला में है। यह घग्गर नदी के तट पर है। 
  • चंदहुदड़ो - यह पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में है। यह सिंधु नदी के तट पर है। 
  • लोथल - यह गुजरात के अहमदाबाद में है। यह भोगवा नदी के तट पर है। 
  • बनवाली -यह हरियाणा के हिसार जिला में है। यह रंगोई या सरस्वती नदी के तट पर है। 
  • रोपड़ - यह पंजाब में है। यह सतलज नदी के किनारे है। 
  • रंगपुर - यह गुजरात में काठियावाड़ जिला में है। यह मादर नदी के तट पर है। 
  • आलमगीरपुर - यह उत्तरप्रदेश में है हिंडन नदी के पास 
  • सुतकागेंडोर -यह पाकिस्तान में है। यह दासक नदी के तट पर है। 
  • कालीबंगा - यह हनुमानगढ़ में है 
  • सुत्काहो -यह पाकिस्तान में है 
  • पैमाना की खोज लोथल में हुआ था। 
  • वस्त्र के लिए कपास की खोज भारत में मोहनजोदड़ों  में हुआ था। 
  • हाथी के दांत की खोज लोथल से हुआ था। 

 (i ) हड़प्पा (1921 ) -  

                                         यह सभ्यता पाकिस्तान में रावी नदी पर थी। यहाँ से कुम्हार का चाक ,श्रम आवास ,अन्नागार ,मातृदेवी की मूर्ति और ओखली प्राप्त हुआ था। 
  • सिंधु सभ्यता का मैसेज -मेसन ने दिया था। 
  • सभ्यता का पालना - एशिया को कहा जाता था। 
  • मानव का पालना - अफ्रीका को कहा जाता था। 
  • 1921 -सिंधु सभ्यता की खुदाई 
  • भारत में पुरातात्विक विभाग की शुरुआत लार्ड कर्जन ने किया था। 
  • हाथी का  कपाल - हड़प्पा 
  • हाथी के दाँत - लोथल ,यहाँ से व्यापार होता था। 
  • घोड़े का साख - सुरकोदड़ा 
  • धान की भूसी - रंगपुर 
  • कलसशवदान - सुरकोदड़ा 
  • शती प्रथा का साक्ष्य - लोथल 
  • श्रमिक आवास  - हड़प्पा 
  • अन्नागार - मोहनजोदड़ों 
  • पंजाब की प्रसिद्ध नदी सतलज के तट पर रोपड़ शहर थी। जिसकी खोज योगदत शर्मा ने किये थे.. यहाँ से मानव के साथ कुत्ता के दाह संस्कार के साक्ष्य मिला। 
हड़प्पा सभ्यता 
  • यहाँ  से ताबूत मिला था। 
  • यहाँ से RH-37 का भी साक्ष्य मिला था। 
  • यहाँ से हाथी के खोपड़ी मिली थी। 
  • यहाँ से एक श्रृंगीय जानवर का भी साक्ष्य मिला था। 
रोपड़ 
  • यह  पंजाब में स्थित है। यह सतलज नदी पर है। 
  • इसे यगदत्त शर्मा ने खोजा था। 
  • यहाँ से कुत्ता के साक्ष्य मिला था। 

  • हरियाणा में बनवाली सभ्यता थी। जो रंगोई नदी पर थी। 
  • इस सभ्यता की खोज रविंदर सिंह ने की थी। 
  • यहाँ नाली की व्यवस्था नहीं थी। 
  • यहाँ की सड़के टेढ़ी -मेढ़ी थी। 
  • यहाँ से हल प्राप्त हुआ था। 
  • राखीगढ़ी (हरियाणा ) - यह सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल  था। 
  • मोहनजोदड़ो -यह सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा शहर था। 
  • चांदी का साक्ष्य - हड़प्पा 
  • भारत का सबसे पश्चिम राज्य - गुजरात 
  • राजस्थान -कालीबंगा - यहाँ से जो साक्ष्य मिला था उसका ट्रिक ऐसे है -काली बीबी चूड़ी AK थापड़ -BK लाल 
  • सिंधु सभ्यता के लोग कहाँ से आये थे - सोमेरु सभ्यता से आये थे -जो मेसोपोटामिया सभ्यता के था। 
  • सिंधु सभ्यता की संस्कृति पश्चिमी मेसोपोटामिया से मिलती है। ये पश्चिम एशिया से आये थे। मेसोपाटीमिया सभ्यता इराक में है। 
  • दुर्ग रहित -चंदहुदरों 
  • इसकी लिपि भावचित्रात्मक थी। 
  • इस सभ्यता से गाय ,घोडा ,शेर का साक्ष्य नहीं मिला था। 
  • इस सभ्यता में माप तौल भी होती थी। इसमें सिर्फ 16 किलो से शुरुआत हुई थी। 
  • वैदिक सभ्यता में धूसर मृदभांड (ग्रे रंग )में था। 
  • चित्रित गेरुवर्णीय मृदभांड हस्तिनापुर से प्राप्त हुआ था। 

मृदभांड  

  • इसकी खोज पूरी दुनिया में सबसे पहले फ़्लिंडर ने की थी 
  • भारत में मृदभांड की खोज बीबी लाल ने की थी। 
  • यह पुरात्विक वेद का वर्णमाला कहा जाता है। 
  • यह नवपाषाण काल में इलाहबाद से प्राप्त हुआ था। 
  • इसके अध्ययन को थर्मोलीमिनेस कहा जाता है। 
  • सबसे अधिक मृदभांड हस्तिनापुर से प्राप्त हुआ था। 
  • हड़प्पा सभ्यता में गैरिक मृदभांड प्राप्त हुआ था। 
  • वैदिक सभ्यता में चित्रितधूसर मृदभांड प्राप्त हुआ था।  
  • महाजनपद (16 महाजनपद ) में पॉलिश(चमकीला ) मृदभांड प्राप्त हुआ था। 
  • हड़प्पा सभ्यता में गैरिक मृदभांड इसे अंग्रेजी में Ochri Colour Pottary कहते है। इसका रंग लाल था। 
  • वैदिक काल में चित्रित धूसर मृदभांड इस अंग्रेजी में Painted Grey Ware कहते है। इसका रंग ग्रे (स्लेटी ) था। इसे प्रीमियम था। 
  • महाजनपद काल में उत्तरी काले चमकीला इसे अंग्रेजी में North Block Polished कहते है। इसे 600 ई पू में खोजा गया था। यह मृदभांड रासयनिकृत था। 
  • मानव द्वारा खोजा गया रासायनिक खोज -मृदभांड था 
  • काले -लाल -मृदभांड (Black-Red-Ware/Pottery ) इसे कृष्ण -लोहित -मृदभांड भी कहते है। यह ताम्रपाषाण काल में मिला था। 
  • मृदभांड के जनक विश्व में -बिलंडर को कहा जाता है। 

मेसोपोटामिया सभ्यता (इराक )

  • इराक में दो नदी थी -ट्रिगिस और यूपटेरस नदी। इन्ही नदियों के बीच में यह सभ्यता थी और यह एक ग्रामीण (देहाती ) सभ्यता थी। 
  • यहाँ सड़क ,नाली और नगरी व्यवस्था नहीं थी। 
  • इस सभ्यता का समय 5000 B.C थी। यह एक पुरानी सभ्यता थी। यह एक ग्रामीण सभ्यता थी। इस सभ्यता का मुख्य आधार कृषि था। 
  • यह सभ्यता चार खंडो में था - (i ) सोमेरु     (ii ) बेबीलोन (झूलता बगीचा ) (सिकंदर का मकबरा )(iii ) असीरिया   (iv ) कैटरिया 

मिश्र की सभ्यता  

  • केमिकल लगाने की सभ्यता 
  • ये पिरामिड बनाते थे 
  • यहाँ से मम्मी मिली थी। 
  • यह नील नदी के पास थी। 
  • यह सभ्यता रसायन की खोज की थी। 

रोमन सभ्यता  

  • यह एक विकसित सभ्यता थी। 
  • यह सभ्यता इटली में थी। 
  • इस सभ्यता में नगरी नियोजन था। 
  • भूमध्य सागर में इस सभ्यता का ज्यादा विकसित हुआ। 

फारस की सभ्यता  

  • यह एक शांति की सभ्यता थी। 
  • इसमें पारसी लोग थे। 
  • फ़ारसी सभ्यता रोमन सभ्यता के समकालीन था। 

ग्रीस की सपाटा की सभ्यता 

  • इसका बड़ा राजा लियोनाइडर्स था। 

वैदिक काल  

  • वह कालखंड जिसमे वेदों की रचना हुई थी 
  • इसका समय 1500 B.C से 600 B.C. था। 
  • वैदिक काल को दो भागों में बांटा जाता है "ऋग्वैदिक काल (1500 B.C. -1000 B.C. ) और उतर -वैदिक काल (1000 B.C. -600 बी.स. )
  • वैदिक सभ्यता की अर्थवयवस्था का मुख्य स्रोत कृषि और पशुपालन थी। 
  • इनके छोटे गांव को ग्रामिक बोला जाता था. 

आर्य  

  • आर्य संस्कृत बोलते थे। 
  • इनकी सभ्यता को वैदिक सभ्यता कहते है। 
  • इस काल में वेद की रचना हुई थी। 
  • आर्य मध्यएशिया से आये थे। 
  • दक्षिण भरम में अगस्त ऋषि ने आर्यीकरण किया और उतर भारत में गौतम राहुगढ़ ने आर्यीकरण किया। इस समय  के राजा विदेह थे। 
  • इनकी प्रमुख विशेषता यह थी कि ये कृषि -पशुपालन करते थे। 
  • आर्य के गुट को कबीला कहा जाता था। भरत कबीला आर्य की थी जिसने भारत के राजा को हरा दिया और इसी के नाम पर भारत नाम पड़ा। 
  • आर्य की समाज पितृ सत्तात्मक था। 
  • इनकी समाज की रचना वर्ण वयवस्था थी। "ब्राह्मण "क्षत्रिय " ,"वैश्य " और शूद्र। 
  • इनके पंचायत को निम्न तीन भागों में बांटा गया था "सभा (इसमें साधारण लोग बैठते थे ), समिति (इसमें संभ्रांत लोग या उच्च लोग बैठते थे। ) और विदथ (इसमें दोनों लोग बैठते थे। )
  • ये तीन प्रकार के यज्ञ करवाते थे "अश्वमेघ यज्ञ " "वाजपेय यज्ञ (शक्ति प्रदर्शन )" और राजाश्रेय (शपथ ग्रहण ) 
  • सबसे प्रमुख देवता इंद्र थे। इनकी चर्चा 250 बार किया गया है। अग्नि की चर्चा 200 बार ,वरुण की चर्चा है , सोम (जो जंगल के देवता थे ) , मारुत (जो तूफान के देवता थे ) , रूद्र (बहुत ही गुस्सा वाले देवता ) इन सबकी चर्चा है। 
  • इनके कर को बाली कहा जाता था। 

नदी 

  • सप्तसैंन्धव नदी 
  • झेलम नदी -इसका पुराणा नाम वितस्तता था। 
  • व्यास नदी इसका पुराण नाम "विपाशा नदी" था। 
  • चिनाव नदी - इसका पुराणा नाम आस्किन नदी था। 
  • सतलज नदी -इसका पुराना नाम सत्रुद्री था। 
  • रावी नदी -इसका पुराना नाम परसुनि था। 
  • सिंधु नदी - इसका पुराना नाम सिंध नदी था। 
  • गंडक नदी - इसका पुराणा नाम सदानीरा था। 
  • सरस्वती नदी - इसका पुराना नाम घघ्घर नदी था। 

दर्शनशास्त्र 

  • 6 प्रमुख दर्शनशास्त्र है 
  • न्याय दर्शन -इसे गौतम ऋषि ने लिखा है। 
  • सांख्य दर्शन - इसे कपिल ऋषि ने लिखा है। 
  • योग दर्शन - इसे पतंजलि ऋषि ने लिखा है। 
  • वैशेषिक दर्शन - इसे कणाद ऋषि ने लिखा है 
  • उतर मिमांश - इसे वादरायण ऋषि ने लिखा है। 
  • पूर्व मीमांस - इसे जैमिनी ऋषि ने लिखा है। 

  • इतिहास को तीन भागों में बांटा गया है -(i ) प्राक इतिहास   (ii ) आद्य इतिहास   (iii ) ऐतिहासिक 
  • अब ऐतिहासिक इतिहास के बारे में जानेगे। 
  • ऐतिहासिक इतिहास एक लिखित इतिहास है। इसे भी तीन भागों में बांटकर अध्ययन किया जाता है - (i ) पुरातात्विक    (ii ) विदेशी यात्री      (iii ) साहित्य 
  • साहित्य में धार्मिक और गैर -धार्मिक आते है। धार्मिक में "ब्राह्मण " और  "गैर -ब्राह्मण " . गैर -ब्राह्मण में "जैन " और "बौद्ध " आते है। 
  • पुरातत्व में हम सिक्का और अभिलेख का अध्ययन करेंगे। 
  • सिक्का विभिन्न सभ्यता और शासन में अलग -अलग तरह से जाना जाता है। 
  • सिंधु सभ्यता में टेराकोटा (मिट्टी का सिक्का ) चलता था। 
  • मौर्य काल में "आहत ,पंचमार्क ,पण के सिक्के चलते है। 
  • यूनानी काल में सोने का सिक्का चलता है। 
  • कुषाण काल में शुद्ध सोने का सिक्का चलता है। 
  • गुप्त काल में सबसे ज्यादा सोने का सिक्का चला ,इस काल में अशुद्ध सोने का सिक्का भी चला स्कंदगुप्त काल में चला। इस काल में चांदी का सिक्का (शुद्ध ) भी चला। इस काल मयूर सिक्का भी चला। इस गाल में कौड़ी भी चला। 
  • सातवाहन काल में शीशा का सिक्का चला था। 
  • हुमायूँ के समय में चमड़ा का सिक्का चला था। 
  • शेरशाहं के समय में "दाम जो गरीब लोगों के लिए था और तांबा का था।" चला। इसी समय में "रुपिया (मध्यम परिवार केलिए जो चांदी का था। " और  असरफी (यह धनिक और बड़े लोगो के लिए था जो सोना का  था )
  • दुनिया में अभिलेख लिखने की शुरआत डेरियस ने किआ जो ईरान का था। 
  • भारत में अभिलेख की शुरुआत अशोक ने किया। 

विदेश 

  • हेरोडेटस ने हिस्टोरिका पुस्तक को लिखे थे। 
  • प्लेनि ने नेचुरल हिस्टोरिका को लिखे थे। 
  • किसी अज्ञात व्यक्ति ने पेरिप्लस ऑफ़ एरिथ्रिएनसी लिखे थे। 
  • टॉलमी ने ज्योग्रफिका लिखा था। 
  • कोपरनिकस और केपलर ने भी लिखा था। 
  • मार्कोपोलो (इटली ) ने "चीन की यात्रा " पुस्तक को लिखा था। 
  • मेगस्थनीज (यूनान ) ने "इंडिका "पुस्तक को लिखा था। 
  • व्हेनसांग ने "सियुक्यु "पुस्तक को लिखा था। 
  • फाह्यान ने "फ़ोक्युकी "पुस्तक को लिखा था। . 
  • इत्सिंग ने "त्रिपिटक की 400 बौद्ध किताब "लिखे थे। 
  • अलबरूनी ने "किताबुल -हिन्द ,किताब -ऐ -हिन्द लिखा था। 
  • अलमसूदी ने भारतीय मानसून नामक पुस्तक लिखा था। 
  • रज्जाक जो फारस के रहने वाला था ने मतला ऐ साहेन पुस्तक लिखा था। 
  • इबनबतूता ने रेहला नामक पुस्तक लिखा था। 

साहित्य 

  • कुरान इस्लाम धर्म से सम्बंधित है। पुराण हिन्दू धर्म से सम्बंधित है। आदि पुराण जैन धर्म से सम्बंधित है। 
  • बौद्ध धर्म - इस धर्म की भाषा पाली भाषी थी। इसके तीन किताब है - (i ) सूत पिटक  (ii ) विनय पिटक  (iii ) अभिधम्म पिटक (बौद्ध की सोच ) . इसे ही त्रिपिटक कहते है। 
  • जातक ,अंगुत्तरनिकाय (महाजनपद की चर्चा ) , ललितविस्तार (बुध की जीवनी ) 
  • ये बौद्ध धर्म की पुस्तक है। 

ब्राह्मण साहित्य :- 

  • वेद (अपुरुषेय है इसका अर्थ है की वेद को किसी पुरुष ने नहीं लिखा है ) (वेद का संकलन कृष्णदोपायन वेदव्यास ने किया था।  ) 
  • 4 वेद होते है। 
  • वेद त्रिय (पहले 3 वेद था ) (अर्थवेद की रचना बाद में हुई थी )

ऋग्वेद 

  • इसे ऐतरय ब्राह्मण भी कहते है। 
  • इसको पढ़ने वाले को होतृ कहते है। इसके 10 भाग है। 
  • इसमें गायत्री मन्त्र की चर्चा है। 
  • इसके उपवेद को आयुर्वेद कहा जाता है। इसके ज्ञाता को होतृ कहा जाता है। 
  • इसके रचनाकार को प्रजापति कहा जाता है। 
  • इसके ब्राह्मण ग्रन्थ को ऐतरय और  कोस्टकी कहते है। 

सामवेद 

  • इसमें संगीत से सम्बंधित है 
  • इसके उपवेद को गन्धर्वेद कहा जाता है। 
  • इसके रचनाकार को नारद कहा जाता है। 
  • इसके ज्ञाता को उदगाथा कहते है। 
  • इसके ब्राह्मण ग्रन्थ को पंचविश कहते है। 

यजुर्वेद 

  • इसमें युद्ध और यंत्र से सम्बंधित है। 
  • इसके उपवेद को धनुर्वेद कहा जाता है। 
  • इसके रचनाकार को विश्वामित्र कहते है। 
  • इसके ज्ञाता को अधर्यु कहते है। 
  • इसके ब्राह्मण ग्रन्थ को तैतरेय और शतपथ कहते है। 
  • इसमें गद्य और पद्य की चर्चा की गयी है। 

अथर्वेद 

  • इसमें जादू -टोना की चर्चा है। इसमें पटना को अछूतो की देश कहा जाता है। 
  • इसके उपवेद को शिल्पवेद कहा जाता है। 
  • इसके रचनाकार को विश्वकर्मा कहा जाता है 
  • इसके ज्ञाता को ब्रह्मा कहते है 
  • इसके ब्राह्मण ग्रन्थ को गोपथ ब्राह्मण कहते है। 
  • आरयण्क (इसका अर्थ है जिस वेद को जंगल में लिखा गया है।) में अथर्वेद शामिल नहीं है। 

वेदांग 

  • वेदांग 6 है। 
  • ये क्रमश है - व्याकरण (इसकी रचना पाणिनि ने की थी "अष्टाध्यायी ) , ज्योतिष ( इसकी रचना वराहमिर ने की थी "वृहतसंहिता ) , निरुक्त , शिक्षा , कल्प , छंद 

पुराण 

  • इनकी संख्या 18 है। 
  • लेकिन 3 पुराण ही प्रमुख है - (i ) विष्णु पुराण (मौर्य काल )  (ii ) मत्स्य पुराण ( सातवाहन वंश )   (iii ) वायुपुराण  (गुप्त काल )

उपनिषद् 

  • इनकी संख्या 108 है लेकिन 13 उपनिषद ही प्रमुख है। 
  • उपनिषद का अर्थ है गुरु के समीप बैठकर ज्ञान प्राप्त करना। 
  • इसमें राजपूत जाति को ज्यादा महत्त्व दिया गया है। 
  • सबसे पहला उपनिषद - वृहदरायण 
  • सबसे बाद का उपनिषद - आलोपनिशद 
  • सत्यमेव जयते मुण्डकोपनिषद में लिखा है। 
  • यम ,नचिकेतन ,ऊं की चर्चा कठोपनिषद में हुई है। 
  • ब्रह्मा ,विष्णु और महेश की चर्चा जालोपनिषद में हुई है। 

स्मृति साहित्य 

  • इनकी संख्या 36 है। 
  • "संसार ही स्वर्ग है " की उल्लेख यञवाल्क्य स्मृति में की गयी है। 
  • मनुस्मृति में निम्नलिखित बाते बताई गयी है कि "लड़कों की शादी 25 वर्ष में होनी चाहिए और लड़की की शादी 12 वर्ष में होनी चाहिए " , इसमें 8 प्रकार के विवाह की चर्चा की गयी है। इसमें 16 संस्कार बताया गया है। 

ऋण 

  • मनुष्य तीन प्रकार के ऋण "देव ऋण ,ऋषि ऋण और पितृ ऋण " से चलता है। 

पुरुषार्थ 

  • धर्म ,अर्थ ,काम ,मोक्ष ये पुरुषार्थ है 
जीवन के प्रकार 
  • पहला है बाल्यावस्था जिसकी उम्र सिमा है "0 वर्ष -5 वर्ष "
  • दूसरा है ब्रह्मचर्य जिसकी उम्र सीमा है " 5 वर्ष से -25 वर्ष तक "
  • तीसरा है गृहस्थ जीवन जिसकी उम्र सीमा है " 25 वर्ष -50 वर्ष तक "
  • चौथा है वानप्रस्थ जीवन जिसकी उम्र है "50 वर्ष से 75 वर्ष"
  • पांचवा है सन्यासी जीवन जिसकी उम्र है "75 वर्ष से जब तक जीते है "

महाकाव्य 

  • भारत के दो प्रमुख महाकाव्य है - "महाभारत और रामयण "
  • रामायण को महर्षि बाल्मीकि लिखे थे , इसमें प्रारम्भ में 12000 श्लोक थे अब वर्तमान में श्लोक की संख्या 24000 है। इसके भाग को "कांड " कहते है। रामायण में 7 कांड है। सबसे बड़ा कांड युद्ध कांड है।  सबसे महत्वपूर्ण कांड सुन्दरकाण्ड है। रामायण के लीला है 
  • महाभारत को महर्षि वेदव्यास लिखे थे। इसके भाग को पर्व कहते है। महाभारत में 18 पर्व है। इसमें शुरुआत में सिर्फ 8800 ही श्लोक थे। लेकिन वर्तमान में श्लोकों की संख्या 1 लाख 11 हजार है। इसे जयसंहिता भी कहते है। सबसे महत्वपूर्ण पर्व भीष्म (भागवत ) है। 
  • हमने साहित्य के अंतर्गत धार्मिक में " ब्राह्मण "के बारे में जाने और ब्राह्मण से जुड़े "वेद ,उपवेद ,ब्राह्मण ग्रन्थ ,आरयण्क ,उपनिषद ,पुराण ,स्मृति और महाकाव्य को देखे। 

जैन धर्म 

  • इस धर्म में तीर्थंकर होते है। ये वे होते है जो सभी दुखों से पार ले जाते है। 
  • इस धर्म के पहले तीर्थंकर ऋषभदेव थे। 
  • इस धर्म के 23 वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ थे। ये चतुरायण सिद्धांत दिए। इनके सिद्धांत के अनुसार झूठ नहीं बोलना चाहिए ,धन नहीं रखना चाहिए ,चोरी नहीं करनी चाहिए और हिंसा नहीं करनी चाहिए 
  • जैन धर्म की भाषा प्रकृति थी। 
  • चौदहपुरवा जैन धर्म की पुस्तक है। 
  • महावीर स्वामी के दो प्रमुख शिष्य - भद्रबाहु और स्थूलबाहु 
  • जैन धर्म दो भागों में बट गया -(i ) दिगाम्बर -भद्रबाहु का समूह    (ii ) श्वेताम्बर -स्थूलबाहु का समूह 
  • जैन धर्म के दो संगीतियाँ हुई थी -(i ) वल्लभी ,गुजरात           (ii ) पाटलिपुत्र 
  • महावीर स्वामी की मृत्यु 468 इ में हुआ था। 
  • श्वेताम्बर और दिगम्बर में निम्नलिखित अंतर है - (i ) श्वेताम्बर सफेद रंग के कपडे पहनते है और दिगंबर कपडे नहीं पहनते है।    (ii ) श्वेताम्बर भोजन करते है और दिगम्बर भोजन नहीं करते है। (iii ) श्वेताम्बर महिला को बढ़ावा दिए और दिग्मबर महिला को शामिल नहीं किये। 
  • पटना में जैन धर्म की पहली सम्मलेन हुआ था।  इसकी अध्यक्षता स्थूलबाहु ने किया। 
  • 600 इ में दूसरा जैन संगीति हुई थी। यह सम्मलेन गुजरात के वल्लभी में हुई थी। इसकी अध्यक्षता देवधिश्रवण ने किया था। 
  • इसमें 12 उपंगा लिखा था 
  • ऋषभदेव का लोगों - वृषभ 
  • पारसनाथ का लोगो - सांप 
  • महावीर स्वामी का लोगो - सिंह 
  • महावीर स्वामी जैन धर्म के 24 वें तीर्थंकर थे। इनका जन्म कुण्डलपुर में हुआ था। इनका जन्म कुंडग्राम ,वैशाली में 540 ई.पू  में हुआ था। इनके पिता का नाम सिद्धार्थ था। ये ज्ञातृक वंश के थे। इनकी माता जी का नाम त्रिशला (ये लिच्छवि के राजा की बहन थी ) था। इनके भाई का नाम नंदिवर्मन था। इनकी पत्नी का नाम यशोदा था। इनकी बेटी का नाम प्रियदर्शिनी था और इनके दामाद का नाम "जमाली " था। इन्होने मात्र 30 वर्ष की आयु में गृह त्याग कर दिया। इन्होने जाम्बिक ग्राम में सालवृक्ष के निचे और ऋजुपलिका नदी के निचे घोर तपस्या किये। इन्होने अपना पहला उपदेश राजगीर में दिया और अंतिम उपदेश पावापुरी में दिए। 
  • महावीर स्वामी का सिद्धांत था "सम्यक ज्ञान ", सम्यक विश्वास " , सम्यक आचरण " , जीव हत्या नहीं करनी चाहिए" , कृषि भी नहीं करना चाहिए ,सबका पुनर्जन्म होगा ,आत्मा,मोक्ष प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या जिसे  संलेखना कहा जाता है। 
  • मथुरा में जैन धर्म की मंदिर है। 
  • गोमतेश्वर के मंदिर को बाहुबली के मदिर कहते है। यह चामुंड वंश ने बनवाया था। 

बौद्ध धर्म 

  • इस धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध थे। 

  • महात्मा बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बनी में हुई थी। इनके पिता का नाम "शुद्धोधन "था। इनकी माताजी का नाम "महामाया "था। इनकी पालन पोषण "गौतमी " ने किया था। इनके बचपन का नाम "सिद्धार्थ " था। ये शाक्य कुल के थे। इनकी पत्नी के नाम "यशोधरा " था। इनके घोडा का नाम "कंटक "था। इनके पुत्र का नाम "राहुल " था। इन्होने मात्र 29 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर दिया। इन्होने सबसे पहले सारनाथ में तपस्या किये।  इसके बाद ये तपस्या के लिए बोधगया चले गए। बोधगया में फल्गु (निरंजना ) नदी के तट पर पीपल वृक्ष के निचे कठिन तपस्या किये। इन्होने सबसे पहला उपदेश सारनाथ में दिए। श्रावस्ती में गौतम बुध ने सबसे अधिक समय बिताये। यही पर गौतम बुद्ध जी को अंगुलिमाल मिला था। इनके प्रिय शिष्य का नाम आनंद था। बौद्ध धर्म में शामिल होने वाली पहली महिला "प्रजापति गौतमी " थी। बौद्ध धर्म में शामिल होने वाली दूसरी महिला "आम्रपाली " थी। गौतम बुद्ध को "शाक्यमुनि "लाइट ऑफ़ एशिया "आदि नाम से जाना जाता था। 
  • बुद्ध धर्म ने चार सत्य दिए - (i ) संसार दुखों से भरा है  (ii ) दुख का कारण ठोस वजह है।  (iii ) दुःख का निवारण संभव है।    (iv ) इच्छा पर नियंत्रण (दुःख का निवारण हेतु अष्टांगिक मार्ग का पालन करना )








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